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Matrik Chhand in Hindi- मात्रिक छंद की परिभाषा, प्रकार तथा उदाहरण

मात्रिक छंद क्या है ? मात्रिक छंद : परिभाषा, प्रकार 

Matrik Chhand kya hai in Hindi- मात्रिक छंद क्या है? इसके प्रकार तथा उदाहरण को इस पोस्ट में exam के दृष्टिकोण से बताया गया है इसे ध्यान से पढ़े और याद करें। यदि हम मात्रिक छंद की बात करें तो ये exam के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे संबंधित बहुत से प्रश्न परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसलिए Matrik Chhand kise kahate hai in hindi- मात्रिक छंद किसे कहते है या मात्रिक छंद की परिभाषा के इस पोस्ट ध्यान से पढ़कर याद करें।

Matrik Chhand in Hindi

इस पोस्ट में बताया गया है-


1. मात्रिक छंद क्या है? इसकी परिभाषा।

2. मात्रिक छंद के भेद।

3. प्रमुख मात्रिक छंद तथा इनके उदाहरण।

इस article में मात्रिक छंद को इतने विषयों पर समझाया गया है नीचे इसे पढ़ें।


1. मात्रिक छंद क्या है? इसकी परिभाषा


मात्रिक छंद की परिभाषा- (Matrik Chhand in Hindi)

मात्रा की गणना के आधार पर की गयी पद रचना को मात्रिक छंद कहते है। अर्थात ऐसे छंद जिनकी रचना मात्रा के गणना के आधार पर किया गया हो उन्हें 'मात्रिक छंद' कहते है। मात्रिक छंद में मात्राओं की संख्या, लघु-गुरु, यति, गति, के आधार पर मात्रिक छंद के पद को रचना की जाती है।


2. मात्रिक छंद के भेद-


यदि हम बात करें मात्रिक छंदों के प्रकार बारे में तो ये तीन प्रकार के होते है।

1. सममात्रिक छंद
2. अर्द्धसम मात्रिक छंद
3. विषम मात्रिक छंद

1. सममात्रिक छंद-

सम छंद के चार चरण होते है। समान चरण वाले छंदों को सममात्रिक छंद कहते है अर्थात सम छंद के चारो चरण मात्राएँ या वर्ण समान ही होते है। जैसे- चौपाई, इन्द्रवज्रा।

2. अर्द्धसम मात्रिक छंद-

अर्द्धसम मात्रिक छंद के पहले और तीसरे चरणों तथा दूसरे और चौथे चरणों की मात्राओं एवं वर्णों में परस्पर समानता होती है। जैसे- दोहा, सोरठा।

3. विषम मात्रिक छंद-

विषम मात्रिक छंद में छः चरण होते है। जहाँ छंदों में दो चरण समान न हो उसे विषम मात्रिक छंद कहते है।


3. प्रमुख मात्रिक छंद तथा इनके उदाहरण।


अभी तक आपने छंद क्या होता है और इनके भेद को जाना अब नीचे प्रमुख मात्रिक छन्दों का वर्णन उदाहरण सहित किया गया है। इसे ध्यानपूर्वक समझें।


1. दोहा- Doha in Hindi


परिभाषा- दोहा अर्द्धसम मात्रिक छंद होता है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती है। इसमें चरण के अंत मे लघु होना चाहिए।

Example 1.
1. कागा काको धन हरै,
कोयल काको देय।
मीठे बचन सुनाय कर,
जग अपनो कर लेय।।

Example 2.
"कारज धीरे होत है, कहे होत अधीर।
समय पाय तरुवर फरै, केतक सींचो नीर।।"


2. सोरठा- Sortha in Hindi


परिभाषा- दोहे का उल्टा रूप सोरठा कहलाता है। यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है। इस छंद के प्रथम और त्रितीय चरण में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के अंत मे एक लघु और एक गुरु होना आवश्यक है।

Example 1.
"मूक होइ वाचाल, पंगु चढ़ै गिरिवर गहन।
जासु कृपा सु दयाल, द्रवौ सकल कलिमल दहन।।"

Example 2.
"कहै जु पावै कौन, विद्या धन उद्दम बिना।
ज्यों पंखे की पौन, बिना डुलाए ना मिलें।।"


3. रोला- Rola in Hindi


परिभाषा- यह एक सम मात्रिक छंद है। इसमे चार चरण होते है जिसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती है तथा 11 और 13 मात्राओं पर यति होता हैं।

Example 1.
कोउ पापिह पंचत्व, प्राप्त सुनि जमगन धावत।
बनि बनि बावन वीर, बढ़त चौचंद मचावत।।
पाई तकि ताकी लोथ, त्रिपथगा के तट लावत।
नौ द्वै ग्यारह होत, तीन पाँचाहि बिसरावत।।

Example 2.
यही सयानो काम, राम को सुमिरन कीजै।
पर-स्वराथ के काज, शीश आगे धर कीजै।।


4. चौपाई- Chaupai in Hindi


परिभाषा- चौपाई एक सम मात्रिक छंद है। चौपाई में चार चरण होते है जिसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती है। चरण के अंत में गुरु या लघु नही होता है परंतु दो लघु और गुरु हो सकते है।

Example
बन्दउँ गुरुपद पदुम परागा।
सुरुचि सुवास सरस अनुरागा।।
अमिय मूरिमय चूरन चारू।
समन सकल भव रुज परिवारू।।


5. कुंडलियाँ- Kundaliyan in Hindi


परिभाषा- यह विषम मात्रिक एवं संयुक्त छंद है। इस छंद का निर्माण दोहा और रोल के संयोग से होता है। इसमें 6 चरण होते है। इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती है।

Example
कोई संगी उत नही है इत को ही संग।
पथी लेहु मिलि ताहि ते सबसों सहित उमंग।।
सबसों सहित उमंग बैठि तरनी के माहीं नदिया नाव संजोग फेरि मिलिहैं पहनाही।। बरनै दीनदयाल पार पुनि भेंट न होई। अपनी-अपनी गैल पथी जों सब कोई।।


6. हरिगीतिका- Harigitika in Hindi


परिभाषा- यह एक सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते है। जिसके प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती है तथा 16 और 12 मात्रा पर यति होता है।

Example
खग-वन्द सोता है अतः कल कल नही होता वहाँ।
बस मन्द मारुत का गमन की मौन है खोता जहाँ।।
इस भाँति धीरे से परस्पर कह कह सजगता की कथा।
यों दिखते है वृक्ष ये हों विश्व के प्रहरी यथा।।


7 बरवै- Barawai in Hindi


परिभाषा- यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है। इसमे चार चरण होते है। इस छंद में कुल 38 मात्राएँ होती है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 12 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरणों मे 7 मात्राएँ होती है।

उदाहरण-
तुलसी राम नाम सम, मीत न आन।
जो पहुँचाव रामपुर, तनु अवसान।।


इस लेख पर अंतिम राय - Conclusion


Matrik Chhand in Hindi- मात्रिक छंद : परिभाषा, प्रकार तथा उदाहरण। इस article में बताया गया कि Matrik Chhand kya hota hai in Hindi- मात्रिक छंद क्या है? और मुझे उम्मीद है कि अब exam में मात्रिक छंद से संबंधित प्रश्न पूछने पर आप इसका सही-सही जवाब लिख पाएंगे।

यदि आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करें जिससे उन्हें भी ये जानकारी हो जाए कि मात्रिक छंद किहे कहते है और मात्रिक छंद तथा इसके प्रकार को समझ सकें।

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