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Veer Ras in Hindi: वीर रस की परिभाषा और उदाहरण

Veer Ras in Hindi: वीर रस क्या है- परिभाषा तथा उदाहरण 

आज हम वीर रस के बारे में जानेंगे और सबसे पहले इसमें Veer Ras kya hai in Hindi जानेंगे और फिर इस पोस्ट में आपको यह बताया जाएगा की Veer Ras ki paribhasha aur udaharan क्या है जानेंगे। इस पोस्ट में वीर रस से संबंधित जितने भी बातें बताई गयी है उसे आप ध्यानपूर्वक पढ़ें एयर याद करें। यह पोस्ट उन क्षात्रों के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है, 10वीं, 12वीं या किसी प्रतियोगी परीक्षा में तैयारी कर रहे हैं।

Veer Ras in Hindi

हिन्दी व्याकरण का यह पोस्ट जिसमें Veer Ras ki paribhasha aur udaharn बताया गया है ये हर विद्यार्थी के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि एक Board Exam देने वाले क्षात्र के लिए जरूरी है, आप यह न समझे कि यह किसी एक व्यक्ति के लिए या किसी एक class के क्षात्रों के जरूरी बल्कि यह सभी क्षात्रों के लिए मत्वपूर्ण है। क्योंकि इस पोस्ट में वीर रस की परिभाषा और उदाहरण को आसान शब्दों में बताया गया है, जिससे आपको ये आसानी समझ आ जाए और आप इसे याद भी कर लें। इस पोस्ट में आपको क्या-क्या जानने को मिलेगा सबसे पहले ये जानेंगे।


आज आप जानेंगे


1. वीर रस क्या है

2. वीर रस की परिभाषा

3. वीर रस का उदाहरण

4. वीर रस के अवयव


1. वीर रस क्या है


वीर रस हिन्दी व्याकरण में रस का एक प्रकार है। जब किसी रचना में वीरता की बातों से मन में जो भाव उत्पन्न होता है, तो इसे उत्साह कहते है और यहाँ पर वीर रस प्रकट होता है, अर्थात वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है। जब युद्ध या किसी कठिन कार्य को करने के लिए मन मे उत्साह की भावना उत्पन्न होती है, तो इसे वीर रस कहते है।

2. वीर रस की परिभाषा


वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है। मन मे जोश भर देने वाली वीरता की कविताओं को पढ़कर, सुनकर या वीरता से संबंधित किसी दृश्य, चित्र को देखकर हृदय में जो 'उत्साह' उत्पन्न होता है उसे वीर रस (Veer Ras) कहते है।

दूसरे शब्दों में जब किसी रचना या वाक्य आदि से वीरता जैसे स्थायी भाव की उत्पत्ति होती है, तो उसे वीर रस कहते है।

Note:- वीर रस में आपको परेशान होने की आवश्यकता नही है कि इन सभी में से कौन-सा परिभाषा याद करने के लिए सही है, आपको मैंने समझाने के लिए इसे detail में बताया है। आप इन सभी को समझकर कोई भी एक याद कर ले ये आपके लिए अच्छा होगा।

3. वीर रस का उदाहरण


Veer Ras ki paribhasha tatha udahara क्या है जानने के बाद इस पोस्ट में Veer ras ka udaharan kya hai नीचे दिया गया है।

Example 1.
1. वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो या सिंह की दहाड़ हो।
तुम कभी रुको नहीं, तुम कभी झुको नही।

Example 2.
चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवारपुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी।

Example 3.
साजि चतुरंग सैन अंग उमंग धारि
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के
नदी नाद मद गैबरन के रलत हैं।।

Example 4.
सत्य कहता हूँ सखे, सुकुमार मत जानों मुझे,
यमराज से भी युद्ध में, प्रस्तुत सदा मानो मुझे।
है और कि तो बात क्या, गर्व मैं करता नही,
मामा तथा निज तात से भी युद्ध में डरता नहीं।।


4. वीर रस के अवयव


वीर रस का स्थायी भाव-  उत्साह।


वीर रस का आलम्बन (विभाव)-  शत्रु, अत्याचारी व्यक्ति।


वीर रस का उद्दीपन (विभाव)-  अहंकार, शत्रु की शक्ति, यश इत्यदि।

वीर रस का अनुभाव-  प्रहार करना, रोमांच, कंप, धर्मानुकूल आचरण करना इत्यादि।

वीर रस का संचारी भाव-  हर्ष, उत्सुकता, गर्व, चपलता, आवेग, स्मृति इत्यादि।


आपने क्या सीखा ? Conclusion


आज आपने Veer Ras ki paribhasha aur udaharn के बारे में Detail में जाना। अब आगे से किसी भी exam में आपसे वीर रस से संबंधित कोई प्रश्न जैसे वीर रस क्या होता है और इसके उदाहरण क्या है, तो इसका जवाब आप आसानी से दे पाएँगें। और मुझे उम्मीद है कि अब आपको Veer Ras in Hindi समझ में आ गया होगा।

मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको ये पोस्ट अच्छा लगा होगा यदि आप चाहे तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों को Share करके दो काम कर सकते है। पहला काम पोस्ट को share करने से आप मुझे support कर सकते है और ये post आप जिसको share करेंगे वो भी Veer ras ki paribhasha tatha udaharan को जान सकेगा।

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